जनपद बाघमारा, स्थान धनबाद, झारखण्ड
*बाघमारा महिला थाना प्रभारी पर युवती ने लगाए गंभीर आरोप: छेड़छाड़ और दुष्कर्म की धाराएं हटाने की लिखित शिकायत*
कतरास। बाघमारा महिला थाना की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक युवती ने महिला थाना प्रभारी वर्षा रानी पर आरोपी को बचाने के लिए प्राथमिकी में हेरफेर करने और छेड़छाड़, दुष्कर्म व धोखाधड़ी जैसी गंभीर धाराएं हटाने का लिखित आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़िता ने कतरास थाना प्रभारी, बाघमारा एसडीपीओ और धनबाद एसएसपी को शिकायत पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़िता के अनुसार, बोकारो निवासी अभिषेक नामक युवक ने उसे नशीला पदार्थ खिलाकर धोखे से उसकी मांग में सिंदूर भर दिया और शादी का झांसा देकर विभिन्न स्थानों पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जब युवती ने सामाजिक रूप से विवाह करने का दबाव बनाया, तो आरोपी टाल-मटोल करने लगा और अंततः उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया।
पीड़िता का आरोप है कि उसने 8 मार्च को बाघमारा महिला थाना में शिकायत दी थी, लेकिन केस दर्ज नहीं किया गया। इस दौरान आरोपी ने अपने साथियों के साथ थाना परिसर में ही उसे जान से मारने की धमकी दी। डरी-सहमी पीड़िता जब दोबारा मामले की जानकारी लेने पहुंची, तो उसे पता चला कि 14 मार्च को उसकी अनुपस्थिति में ही प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसमें से छेड़छाड़, बलात्कार और धोखाधड़ी की मुख्य धाराओं को हटा दिया गया है। पीड़िता का कहना है कि थाना प्रभारी ने जानबूझकर केस को कमजोर किया है ताकि आरोपी को बचाया जा सके।
इस मामले पर झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता गजेंद्र यादव ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि अनुसंधानकर्ता की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारी को अविलंब निलंबित किया जाना चाहिए, अन्यथा जांच प्रभावित हो सकती है।
युवती ने प्रशासन से मांग की है कि कूट रचना के जरिए प्राथमिकी बदलने के मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और उसे न्याय मिले।
Report इंडिया 19 से तबरेज़।


